
अनूपपुर।
जिले के शासकीय महाविद्यालय राजनगर में सार्थक ऐप के माध्यम से फर्जी डिजिटल हाजिरी लगाए जाने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे समय से चल रहे इस कथित खेल ने अब बड़ा रूप ले लिया है और कई अतिथि विद्वानों पर कार्रवाई की तलवार लटकती नजर आ रही है। सूत्रों की मानें तो कॉलेज में पदस्थ कुछ अतिथि विद्वान महाविद्यालय में उपस्थित हुए बिना ही अपने गृह गांव या जिले से बाहर रहते हुए भी सार्थक ऐप पर हाजिरी दर्ज कर रहे थे।
ओडी के नाम पर उठ रहे सवाल
बताया जा रहा है कि यह पूरा खेल कई महीनों से सुनियोजित तरीके से चल रहा था। कुछ शिक्षक “ओडी” यानी ऑफिसियल ड्यूटी के नाम पर कॉलेज से बाहर रहते थे, लेकिन उसी दौरान उनके गृह क्षेत्र से डिजिटल उपस्थिति दर्ज होना कई सवाल खड़े कर रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब संबंधित कर्मचारी विश्वविद्यालय या अन्य कार्य के लिए बाहर भेजे गए थे तो उनकी लोकेशन किसी दूसरे स्थान की कैसे दिखाई दे रही थी।
संरक्षण के आरोपों से बढ़ी गंभीरता
सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले में कॉलेज प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि प्रभारी प्राचार्य के संरक्षण में यह व्यवस्था लंबे समय से संचालित हो रही थी, जिसके कारण संबंधित लोगों का डर और जवाबदेही दोनों समाप्त हो चुके थे। शासन द्वारा छात्रों की शिक्षा के लिए जारी राशि का दुरुपयोग कर बिना कार्य किए वेतन लेने का मामला अब गंभीर वित्तीय अनियमितता के रूप में देखा जा रहा है।
भुगतान रोका, मांगा जा रहा स्पष्टीकरण
जानकारी के अनुसार फिलहाल अतिथि विद्वानों का भुगतान भी रोक दिया गया है। लीड कॉलेज स्तर पर मामले की जांच की जा रही है। बताया गया है कि जिन कर्मचारियों की लोकेशन कार्य क्षेत्र से बाहर पाई गई है, उनकी उपस्थिति काटी जा रही है तथा उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा जा रहा है कि आखिर वे बाहर रहकर सार्थक ऐप का उपयोग कैसे कर रहे थे।
मौखिक आदेशों पर खड़े हुए सवाल
वहीं इस पूरे मामले पर प्रभारी प्राचार्य का कहना है कि संबंधित शिक्षकों को मौखिक आदेश पर बच्चों के कार्य और विश्वविद्यालय संबंधी कामों के लिए भेजा जाता था। हालांकि विभागीय कार्यों में लिखित आदेशों का अभाव भी अब सवालों के घेरे में है। बिना किसी लिखित अनुमति के लंबे समय तक बाहर रहकर उपस्थिति दर्ज करना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा असर
गौरतलब है कि पूर्व में भी ऐसे मामले सामने आए थे, जहां कुछ शिक्षक 15 से 20 दिनों तक कार्यक्षेत्र से बाहर रहते हुए भी नियमित उपस्थिति दर्ज करते पाए गए थे। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था पर चिंता बढ़ा दी है। जहां शिक्षकों का मुख्य दायित्व विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, वहीं कई शिक्षक निजी कार्यों में व्यस्त दिखाई दे रहे है
जांच में खुल सकते हैं कई और नाम
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी निष्पक्ष जांच करता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है। यदि विस्तृत जांच की गई तो कई और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
इनका कहना है कि
कुछ शिक्षक हमारे मौखिक आदेश से बच्चों के काम के लिए यूनिवर्सिटी जाते हैं अगर उनका लोकेशन यूनिवर्सिटी का नहीं शो कर रहा है
मैं अभी छुट्टी पर हूं जाने के बाद नोटिस देकर पता करता हूं
सुनील भोंसले
प्रभारी प्राचार्य
शासकीय महाविद्यालय राजनगर
इनका कहना है कि
ऐसे शिक्षकों की जांच किया जा रहा है उनका वेतन काटा जाएगा !
अनिल सक्सेना
अग्रणी महाविद्यालय शासकीय तुलसी कॉलेज अनूपपुर








