हमने बोला तो बवाल तय है

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आंदोलन का एक माह पूर्ण, एक भी मांग पर नहीं हुआ काम – भूपेश शर्मा

15 मार्च से अनिश्चितकालीन वृहद जनआंदोलन की चेतावनी

अनूपपुर (अरविन्द द्विवेदी) –

रामपुर बटुरा खुली खदान परियोजना से प्रभावित किसानों द्वारा 25 दिसंबर 2025 से अनिश्चितकालीन जनआंदोलन प्रारंभ किया गया था, जिसे 2 जनवरी 2026 को कुछ मुद्दों पर लिखित समझौते के बाद स्थगित किया गया। समझौते में अलग-अलग मांगों के निराकरण के लिए तीन दिन से लेकर तीन माह तक की समय-सीमा तय की गई थी, लेकिन एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद एक भी मांग पर कोई ठोस कार्य नहीं हुआ है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता एवं किसान नेता भूपेश शर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह किसानों के साथ खुला छल है। उन्होंने बताया कि रोजगार से संबंधित 10 फाइलें चिन्हित की गई थीं, लेकिन अब तक एक भी फाइल पर कार्यवाही नहीं हुई। जब भी खदान बंद होने की बात आती है, प्रबंधन हर समस्या को “बाद में देखेंगे” कहकर टालने की कोशिश करता है। किसान सज्जन होता है इसलिए बार-बार ठगा जाता है, लेकिन अब आंदोलन का स्वरूप अलग होगा।

क्षेत्र के किसानों के साथ हो रहा अन्याय –

भूपेश शर्मा ने कहा कि लगातार बैठकों में अब यह निर्णय उभरकर सामने आ रहा है कि यदि जरूरत पड़ी तो संपूर्ण खदान बंद कर दी जाएगी। यहां तक कि नेशनल हाईवे को बंद करने जैसे विषयों पर भी चर्चा हो रही है। किसानों का कहना है कि जिस कोयले के कारण सोहागपुर एरिया की पहचान बनी, उसी क्षेत्र के किसानों के साथ अन्याय हो रहा है। इस स्थिति पर प्रसिद्ध कहावत “घर के लड़का गोही चटाए, मामा खाए अमावट” पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। उन्होंने बताया कि आंदोलन स्थगन के दौरान प्रबंधन द्वारा लिखित एवं मौखिक दोनों तरह के आश्वासन दिए गए थे। कई रोजगार फाइलों के संबंध में यह कहकर लिखित में शामिल नहीं किया गया कि अति शीघ्र रोजगार दिया जाएगा, लेकिन अब स्थिति यह है कि अंधेर नगरी, चौपट राजा जैसी हालत बन गई है।

कॉलरी प्रबंधन जानबूझकर कर रहा विलंब –

किसान नेता ने बताया कि जिला प्रशासन की टीम एसडीएम सोहागपुर एवं तहसीलदार बुढार द्वारा कई बार प्रबंधन को किसानों के न्यायसंगत मामलों का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए गए, इसके बावजूद कोई प्रगति नहीं हुई। अब यह समझ से परे है कि प्रबंधन कार्य करना नहीं चाहता या फिर जानबूझकर विलंब कर रहा है।
भूपेश शर्मा ने बताया कि किसानों ने प्रबंधन को अंतिम अवसर देते हुए उनके द्वारा मांगे गए समय के अनुसार ढाई माह का अतिरिक्त समय दे दिया है। इसके बाद भी यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो 15 मार्च से वृहद जनआंदोलन प्रारंभ किया जाएगा। यह आंदोलन पूरी तरह जन आंदोलन होगा, जिसमें जनता स्वयं अपनी बात रखेगी और काम पूरा कराएगी। काम होने के बाद ही खदान को पुनः चालू करने पर विचार किया जाएगा।

प्रभावित किसानों की प्रमुख मांगें –

(1)- संपूर्ण मकान का मुआवजा एकमुश्त भुगतान किया जाए। (2)- लंबे समय से लंबित सभी रोजगार फाइलों पर तत्काल रोजगार दिया जाए। (3)- आर एंड आर (पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन) की राशि 3 लाख से बढ़ाकर 7 लाख रुपए कर तत्काल भुगतान किया जाए। (4)- जो विस्थापित किसान नकद राशि नहीं चाहते, उनके लिए न्यू रामपुर का तत्काल बसाहट कार्य शुरू किया जाए।

किसान नेता ने प्रश्न उठाया कि इन मांगों में कौन सी मांग अनुचित है या किस प्रकार का अन्याय किया जा रहा है? इस संबंध में उन्होंने प्रेस के माध्यम से जिला कलेक्टर महोदय, समस्त संबंधित अधिकारियों एवं सोहागपुर एरिया के महाप्रबंधक का ध्यान आकर्षित करते हुए स्पष्ट किया कि यह केवल चेतावनी नहीं है। यदि 15 मार्च तक समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो होने वाले वृहद आंदोलन की संपूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन एवं प्रशासन की होगी।

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Author: Bole To Bawal

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