
बोले तो बवाल | अयोध्या | 27 जनवरी 2026
अयोध्या में तैनात राज्यकर विभाग (GST) के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा देकर प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने सबसे पहले अपनी पत्नी को फोन किया, जहां बातचीत के दौरान वे खुद को संभाल नहीं पाए और फफक-फफक कर रो पड़े। उन्होंने कहा— “हां, हैलो… मैंने इस्तीफा दे दिया है, अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा।”
उन्होंने यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन और आत्मसम्मान के आधार पर लिया है।
‘जिसका नमक खाते हैं, उसका अपमान सहन नहीं’
पत्नी से बातचीत में प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि वे बीते दो दिनों से मानसिक तनाव में थे और ठीक से सो नहीं पाए। उनका कहना था कि वे जिस सरकार के तहत काम करते हैं, उसी नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां चुपचाप सुनना उनके लिए संभव नहीं था। उन्होंने इसे अपने संस्कार और राजकीय कर्तव्य से जोड़ा।
राज्यपाल को भेजा दो पन्नों का इस्तीफा

प्रशांत कुमार सिंह ने अपना इस्तीफा उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को संबोधित किया है। पत्र में उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणियों को अमर्यादित और लोकतंत्र के खिलाफ बताया है।
‘मैं सिर्फ अधिकारी नहीं, एक नागरिक भी हूं’
इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि वे केवल एक वेतनभोगी अधिकारी नहीं, बल्कि एक पिता और जिम्मेदार नागरिक भी हैं। उनकी दो बेटियां हैं और वे चाहते हैं कि बच्चे देखें कि उनके पिता सही और गलत के बीच खड़े होने से नहीं डरे। उन्होंने साफ किया कि इस्तीफा मंजूर होने तक वे अपने सभी सरकारी दायित्व निभाते रहेंगे।
निष्कर्ष: पद छोड़ा, लेकिन सवाल छोड़ गए
प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा केवल एक अधिकारी का पद छोड़ना नहीं है, बल्कि यह सवाल छोड़ जाता है—
.क्या सरकारी अधिकारी केवल तटस्थ मशीन होते हैं?
.क्या आत्मसम्मान और राजकीय धर्म की कोई सीमा होती है?
.और क्या लोकतंत्र में असहमति का यह भी एक रूप हो सकता है?
इन सवालों के जवाब समय देगा, लेकिन इतना तय है कि अयोध्या के इस GST अधिकारी का फैसला लंबे समय तक चर्चा में रहेगा।








