
उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69000 शिक्षक भर्ती से जुड़ा विवाद एक बार फिर सियासी और सामाजिक रूप से गर्माता नजर आ रहा है। वर्षों से न्याय की आस लगाए बैठे आरक्षित वर्ग (OBC, SC-ST) के हजारों अभ्यर्थियों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
2 फरवरी 2026 से राजधानी लखनऊ में बड़े आंदोलन की घोषणा ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर मामले को लंबित रख रही है, जबकि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, मुख्यमंत्री की जांच समिति और लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच का फैसला उनके पक्ष में आ चुका है।
इस बीच 4 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई होनी है, जिससे पहले आंदोलन की रणनीति ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
69000 शिक्षक भर्ती मामला: क्यों फिर सुलगा विवाद?
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2018 में निकली 69000 सहायक शिक्षक भर्ती शुरुआत से ही विवादों में रही है। खासकर आरक्षण के रोस्टर और कटऑफ निर्धारण को लेकर मामला कोर्ट तक पहुंचा।
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का कहना है कि OBC आरक्षण का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिससे हजारों योग्य उम्मीदवार नौकरी से वंचित रह गए।
इस मामले की पहली सुनवाई सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट में हुई थी। इसके बाद से लगातार तारीख पर तारीख मिलती रही, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। अब अभ्यर्थियों का धैर्य जवाब दे चुका है।
“सरकार कोई पहल नहीं कर रही” – आंदोलनकारी नेताओं का आरोप
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने साफ शब्दों में कहा कि—
“अगर सरकार चाहती तो अब तक इस प्रकरण का समाधान हो चुका होता। लेकिन जानबूझकर मामले को सुप्रीम कोर्ट की तारीखों के भरोसे छोड़ा जा रहा है।”
उन्होंने बताया कि 2 फरवरी से लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए—
.सभी जिला कोऑर्डिनेटरों को ब्लॉक स्तर पर संपर्क करने के निर्देश दिए गए हैं
.आंदोलन में आने वाले अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की सूची तैयार की जा रही है
.31 जनवरी की शाम तक संख्या का आंकलन पूरा किया
जाएगा
.संख्या के आधार पर विधानसभा घेराव का अंतिम निर्णय लिया जाएगा
यह रणनीति साफ संकेत देती है कि आंदोलन सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि व्यापक जनआंदोलन बनने की ओर बढ़ रहा है।
OBC आयोग और हाईकोर्ट का फैसला पक्ष में, फिर भी क्यों लटका मामला?
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए यह सवाल सबसे बड़ा है।
अमित मौर्य, जो इस आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े हैं, कहते हैं—
“राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच का फैसला—तीनों हमारे पक्ष में हैं। इसके बावजूद हमें न्याय नहीं मिल रहा।”
उनका आरोप है कि यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सामाजिक भेदभाव का मामला भी है।
“हम पिछड़े और दलित समाज से आते हैं, इसलिए हमारी आवाज को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।”
यह बयान आने वाले दिनों में सियासी बहस को और तेज कर सकता है।
छह साल का इंतजार, टूटता भरोसा
विक्रम यादव, जो पिछले छह वर्षों से इस लड़ाई में शामिल हैं, भावुक होकर कहते हैं—
“हमने अपनी जवानी, अपना करियर और अपने सपने—सब कुछ इस भर्ती के भरोसे छोड़ दिया। सरकार से बार-बार गुहार लगाई, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी।”
उनका कहना है कि लगातार देरी के चलते—
.कई अभ्यर्थी उम्र सीमा पार कर चुके हैं
.कई मानसिक और आर्थिक तनाव से गुजर रहे हैं
.कुछ ने मजबूरी में दूसरे कम वेतन वाले काम पकड़ लिए
इस स्थिति ने आंदोलन को सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि मानवीय संकट का रूप दे दिया है।
2 फरवरी से लखनऊ में आंदोलन, 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की परीक्षा
69000 शिक्षक भर्ती केस में फरवरी का पहला सप्ताह बेहद अहम माना जा रहा है।
एक तरफ—
.2 फरवरी 2026 से लखनऊ में आरक्षित वर्ग का आंदोलन
.धरना, प्रदर्शन और संभावित विधानसभा घेराव
दूसरी तरफ—
.4 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस सुनवाई में भी मामला टलता है, तो आंदोलन और उग्र हो सकता है।
सियासी माहौल होगा गर्म, सरकार पर बढ़ेगा दबाव
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, OBC और SC वर्ग का आंदोलन प्रदेश की राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है।
चुनावी दृष्टि से अहम माने जाने वाले इस वर्ग की नाराजगी—
.विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका दे सकती है
.सत्ताधारी दल के लिए सामाजिक संतुलन बिगाड़ सकती है
यही कारण है कि यह मामला अब सिर्फ भर्ती विवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है।
मुख्य मांगें क्या हैं?
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें—
.69000 शिक्षक भर्ती में OBC आरक्षण का सही अनुपालन
.कोर्ट और आयोग की रिपोर्ट के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए
.वर्षों से लंबित मामले का तत्काल समाधान
.भविष्य में ऐसी भर्तियों में पारदर्शी रोस्टर सिस्टम लागू किया जाए
आगे क्या?
अब सबकी निगाहें—
.2 फरवरी के आंदोलन की व्यापकता
.4 फरवरी की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई
और सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं
अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे और प्रभावशाली भर्ती आंदोलनों में शामिल हो सकता है।
बोले तो बवाल | एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
69000 शिक्षक भर्ती का मामला सिर्फ नौकरी का नहीं, बल्कि न्याय, आरक्षण और सामाजिक सम्मान से जुड़ा सवाल बन चुका है।
अब देखना यह है कि सरकार और न्यायपालिका इस लंबे संघर्ष को कब और कैसे खत्म करती है।








