
पत्रकारिता जगत में अपनी सशक्त पहचान बनाने वाले तथा नगर परिषद डूमरकछार के निर्विरोध अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार चौरसिया के जीवन में 01 फरवरी एक ऐतिहासिक दिन के रूप में दर्ज है। यह तारीख उनके लिए केवल कैलेंडर का एक पन्ना नहीं, बल्कि संघर्ष, सेवा और समर्पण की वह आधारशिला है, जिस पर उनका संपूर्ण सार्वजनिक जीवन खड़ा है। जिसने उन्हें जनसेवा के पथ पर स्थायी रूप से स्थापित किया। यही दिन उनके राजनीतिक और सामाजिक सफर की मजबूत नींव बना, जो आज एक सफल मुकाम तक पहुंच चुका है।
अनूपपुर (अरविन्द द्विवेदी) –
जनसेवा को समर्पित अपने जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव को याद करते हुए डॉ. सुनील कुमार चौरसिया ने 01 फरवरी को अपने सार्वजनिक जीवन के 26 वर्षों की यात्रा को भावुक शब्दों में साझा किया। यह तिथि उनके लिए दोहरे कारणों से विशेष महत्व रखती है। डॉ. चौरसिया ने बताया कि 01 फरवरी 2000 को उन्हें डोला एवं डूमरकछार कोयलांचल क्षेत्र की देवतुल्य जनता का आशीर्वाद जनपद सदस्य के रूप में प्राप्त हुआ था। यही नहीं, इसी दिन उनकी इकलौती बहन का विवाह भी संपन्न हुआ था, लेकिन लोकतंत्र के प्रति अपने कर्तव्य को प्राथमिकता देते हुए वे मतदान व्यवस्था के कारण विवाह समारोह में शामिल नहीं हो सके।
बॉर्डर पर प्रतिबंध, नहीं पहुंचे इकलौती बहन की शादी पर –
उन्होंने उस समय की परिस्थितियों को याद करते हुए बताया कि मतदान के दिन सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देकर वे बहन की शादी में शामिल होने के लिए निकले थे, लेकिन नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण मध्यप्रदेश–बिहार बॉर्डर पर स्थित रामानुजगंज में सीमा सील हो गई और उन्हें रात वहीं बितानी पड़ी। उस समय न तो छत्तीसगढ़ और न ही झारखंड राज्य का गठन हुआ था। बहन की शादी में शामिल न हो पाने का मलाल आज भी उनके मन में है।
1 फरवरी को जनपद सदस्य के रूप में हुए थे निर्वाचित –
डॉ. सुनील कुमार चौरसिया ने बताया कि उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर, मनेन्द्रगढ़ से प्राप्त की और वर्ष 1995 में पत्रकारिता के माध्यम से समाज सेवा की शुरुआत की। इसके पश्चात 01 फरवरी 2000 को जनपद सदस्य के रूप में निर्वाचन उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। उस समय जनता द्वारा दिया गया आशीर्वाद आज भी उनके लिए संजीवनी बूटी के समान है। उनका यह संघर्षपूर्ण, ईमानदार और प्रेरक सफर न केवल वर्तमान पीढ़ी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक सशक्त मार्गदर्शक है।
प्रथम निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने का मिला अवसर
नगर परिषद डूमरकछार के गठन के बाद प्रथम निर्वाचन में निर्विरोध पार्षद एवं निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने का अवसर मिला। इसके साथ ही जिला योजना समिति के चुनाव में सहयोग कर जिला योजना समिति के सदस्य के रूप में निर्वाचित किए जाने पर उन्होंने जनता, मित्रों, सहयोगियों और शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि 1995 से लेकर आज तक समाज सेवा के क्षेत्र में वे स्वयं को एक सिपाही मानते हुए निरंतर कार्य कर रहे हैं। इस दौरान जनहित और समाजहित से जुड़े अनेक मुद्दों को उठाकर जनता को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। जनता-जनार्दन का स्नेह, प्यार और आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है।
निरंतर जनता की सेवा करना उनके जीवन का लक्ष्य –

01 फरवरी डॉ. चौरसिया के जीवन में केवल एक तारीख नहीं बल्कि जनसेवा, त्याग और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक बन चुकी है। इस मौके पर डॉ. चौरसिया ने कहा कि सामाजिक क्षेत्र में और बेहतर कार्य करते हुए जनता की सेवा करना उनका निरंतर लक्ष्य है। इसके लिए उन्होंने सभी से सुझाव, मार्गदर्शन और आशीर्वाद की अपेक्षा व्यक्त की। अंत में उन्होंने सभी क्षेत्रवासियों के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि आप सभी सपरिवार स्वस्थ, व्यस्त और मस्त रहें, उन्नति करें, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ उन्होंने अपनी बात समाप्त की।








