
अनूपपुर (अरविन्द द्विवेदी) –
केंद्रीय बजट 2026–27 दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और संरचनात्मक विकास पर केंद्रित दिखाई देता है। सरकार ने राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दी है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि नीति-निर्माता उपभोग-आधारित विकास के बजाय परिसंपत्ति-सृजन आधारित विकास मॉडल को आगे बढ़ाना चाहते हैं। राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने का लक्ष्य भारत की व्यापक आर्थिक विश्वसनीयता, निवेशकों के विश्वास तथा ऋण रेटिंग के लिए सकारात्मक माना जा सकता है। कर नीति के संदर्भ में यह बजट स्थिरता और सरलता पर आधारित है। आयकर स्लैब में बड़े बदलाव न करके सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि वर्तमान फोकस कर राहत से अधिक कर अनुपालन, प्रशासनिक सुधार तथा वाद-विवाद में कमी पर है। अप्रत्यक्ष करों, विशेषकर वस्तु एवं सेवा कर (GST) में बड़े संरचनात्मक परिवर्तन न होना व्यापार एवं पेशेवर वर्ग के लिए निश्चितता और पूर्वानुमेयता प्रदान करता है। बजट में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, विनिर्माण, अवसंरचना तथा डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की रणनीति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जिससे औपचारिकीकरण, रोजगार सृजन और दीर्घकालिक कॉरपोरेट लाभप्रदता को समर्थन मिलेगा। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास में निवेश यह दर्शाता है कि सरकार मानव पूंजी और उत्पादकता वृद्धि को आर्थिक विकास का आधार मान रही है।
इनका कहना है –
यह बजट लोकलुभावन न होकर एक अनुशासित, सुधारोन्मुख और विकास-केंद्रित बजट है जो मध्यम एवं दीर्घ अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए अनुकूल माना जा सकता है।
आकाश खेमका
चार्टर्ड एकाउंटेंट, अनूपपुर








